Saturday, January 8, 2011

चुड़ियों की झंकार

चुड़ियों की झंकार नहीं, कलमवाली तलवार से जीतेंगे हम मन लोगों का।
अब पायल की छन-छन नहीं करती हमें कमजोर
बंद चहार-दीवारी की घुटनभरी जिन्दगी हमने दिया छोड़
महकेगी-दमकेगी बगीया मां की उन सपनों की जो देखे थे अपने लिए
मर्यादा के नाम पर बंधनों में बांधना अब जा भूल।
धोखे में रखने की चाहत होगी फिजूल
जीवन के कसौटी से सबक लेके एक नया मुकाम बनायेंगे।
तन ही नहीं मन की दृढ़शक्ति से दुनिया में नाम कमायेंगे।
अबला नहीं सबला बनके सबको राह दिखायेंगे।
घर की जिम्मेदारियों से लेकर बाहर में भी वर्चस्व बनायेंगे
क्योंकि चुड़ियों की झंकार नहीं कलमवाली तलवार से जीतेंगे हम मन लोगों का

Friday, January 7, 2011

नई सोच के साथ सबल होती महिला

नया वर्ष दस्तक दे चुका है। नई उमंगे हर्ष और उल्लास के साथ मन के अन्दर उमड़-घुमड़ रहे हैं कि आने वाला समय को किस प्रकार नई सोच से संवारा जाये। बच्चे, बुढ़े हो या फिर जवान सभी नई जोश के साथ आगे बढ़ने को तैयार हैं। आने वाले समय में भी महिलाएं जिसके रुप अनेक, स्वरुप एक खुशियां बांटना। चाहे वो खुशी उसके खाने से हो, या फिर परिवार को आर्थिक रुप से हाथ बंटाकर। घर-आंगन से लेकर दुनियां के हर छोर पर महिलाओं का परचम लहरा रहा है। सभी क्षेत्रों में इनकी भागीदारी दिन दोगुनी, रात चौगुनी बढ़ रही है। आज की महिलाएं अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर नित नये आयाम बनाते जा रही है। घर की शोभा मात्र समझी जाने वाली स्त्री बड़े-बड़े कारपोरेट जगत के फलने-फुलने में अहम भूमिका निभा रही हैं। जहां राष्ट्रीय स्तर पर चंदा कोचर, इंदिरा नुयी, शोभना भरतीया, साइना नेहवाल, सानिया मिर्जा, प्रियंका चोपड़ा जैसी लाखों स्त्रियां अपने गुण और कौशल से सब पर छा रही हैं। वहीं इस राज्य की भी स्त्रियां किसी भी मामले में कमतर नहीं दिखती हैं। पुष्पा चोपड़ा, शारदा सिन्हा, नीतू चन्द्रा, लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार, समाज कल्याण मंत्री परवीन अमानुल्लाह वंदना प्रेयसी, शिला ईरानी जिसने अपनी मेहनत के बल पर एक मुकाम बनाया है।

Wednesday, January 5, 2011

थूकने

थूकने वाले कहां-कहां नहीं थूकते
सीढ़ी के कोने में, घर के दीवारों पर
ऑफिस के बेसिन में
थूकते-थूकते थूक लेते हैं भाग्य पर
फिर भी उनकी आंखे रहती है बंद
दिन-व-दिन हौसले होते हैं बुलंद
कोई पान खाकर थूकता है
तो कोई खैनी और कोई गुटखा
एक जमाना हुआ करता था थूकने का
अब बुढ़ा-बच्चा सभी है आदी थूकने का
आदी कहें या मजबूरी
जिंदगी की कम पड़ी धूरी
चबाते-चबाते जबड़े ने दिया जवाब
उन्हें शायद पता नहीं जिसे समझते हैं
मर्दांगनी, वही ढकेल रहा है नामर्दगी की
अब भी तो समझो जनाब।

Friday, December 31, 2010

नर्व वर्ष

पुलकित ये मन मेरा आज ये गाता है,
नया वर्ष है स्वागत तुम्हारा
नजराने तेरे, संवरे कल हमारा
हर पल करुं तेरा नमन
सुखी बने सबका जीवन
पुलकित ये मन मेरा आज ये गाता है
नया वर्ष है स्वागत तुम्हारा
नया जोश, नई उमंग पल-पल हो संग
मौत के बदले हो सत्य की जंग
खुशी आये सबके द्वारे
आंखों के सपने बन जायें तारे
पुलकित ये मन मेरा आज ये गाता है
नव वर्ष है स्वागत तुम्हारा

Thursday, December 30, 2010

झरझरिया का कमाल

हमारे उभरते भारत में शहर तरक्की की राह में पल-पल नया मुकाम बनाता जा रहा है। शहरों में बुनियादी सुविधाएं पलक झपकते हीं आंखों के सामने आ जाती है। लेकिन दूसरी ओर गांव जहां हमारी आत्मा बसती है, हम लाख तरक्की पर तरक्की कर ले। लेकिन हमारी जड़े हमेशा गांवों में ही रहेगी।
हम बात कर रहे हैं देश के सबसे गरीब कहे जाने वाले राज्य बिहार की। दूर-दराज के देहाती क्षेत्रों में आज भी बुनियादी सुविधाएं न के बराबर नजर आती है। गांव के लोग बीमार हो या कोई गर्भवती महिला खटिया पर ही टांग कर अस्पताल ले जाया जाता है।
इन सभी परेशानियों और दिक्कतों के बीच एक आशा की किरण दिखी है वो है झरझरिया। नाम सुन के कुछ अटपटा लगेगा, पर चीज है बड़े कमाल का, चलता है पेट्रॉल से, पर नाम है ठेलागाड़ी। जहां तक बैलगाड़ी की बात मोटरगाड़ियों के आने से इसका अस्तित्व मानों खत्म सी होती जा रही है। अब बैलगाड़ी गिने-चुने जगहों पर ही चलती है। शहरों में जहां इसका प्रयोग समान ढोने में किया जाता है। वहीं ग्रामीण इलाकों में झरझरिया का कमाल सभी के सर चढ़ कर बोल रहा है। अनाज, खाद या फिर किसी प्रकार की ढलाई का काम हो झरझरिया हर १० मिनट पर हाजिर मिलता है। झुंड के झुंड ग्रामीण इस पर चढ़कर नजदीकी बाजार में खरीदारी के लिए जाते हैं।

Thursday, December 23, 2010

प्याज ने उड़ाई सरकार की नींद


सरकार की गलत नीतियों के कारण आज महंगाई आसमान छू रही है। इस महंगाई में आम से लेकर खास को भी नाको चने चबाने पड़ रहे हैं। सभी परेषानियों से बेपरवाह सरकार केवल यह बयान जारी करती है कि जल्द ही महंगाई पर काबू पा लिया जाएगा। यह कैसी नीति है किसी को भी समझ में नहीं आ रही है कि आखिर सरकार क्या चाहती है? क्या गरीब जनता उनके दिलासों से अपने घर का चुल्हा फुकें या अंत में जन आंदोलन कर उस सरकार को गद्दी से उठा फेंके। जिस प्याज ने कभी ऐसा रुलाया था कि उस समय की वर्तमान वाजपेयी सरकार को चुनाव में औंधे मुहं गिरनी पड़ी थी। लो आज भी फिर वही घड़ी आयी है। आज प्याज 80रुपया और लहसुन 250 रुपये बिक रहे हैं। प्याज की कीमतों में अप्रत्याषित वृद्धि ने सरकार की नींद हराम कर दिया है। सरकार आनन-फानन में केन्द्र और राज्य स्तर पर जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। अधिक से अधिक प्याज आयात करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रष्न यह उठता है कि जो कदम आज उठाया जा रहा है वह चीजों के दाम बढ़ने के पहले क्यों नहीं उठायी जाती है। क्या उनको वस्तुओं के दाम बढ़ने की जानकारी नहीं होती है, या जानबुझ कर आम जनता के अरमानों के गला घोंटने की साजिष की जाती है। कारण कोई भी हो सरकार को प्याज और लहसुन जैसी रोजमर्रा की खाद्य पदार्थों के कीमतों पर लगाम लगाना ही पड़ेगा, नही तो ये प्याज सरकार को रोने तक का मौका नहीं देगा।

Friday, December 17, 2010

उद्योग के लिए सरकार के खुले द्वार

राज्य सरकार इस बार बिहार में औद्योगिक विकास पर मुख्य रुप से ध्यान देने का मन बना लिया है। इसका मुख्य कारण पहले के मुकाबले लॉ इन आॅर्डर का बेहतर होना माना जा रहा है। उद्योगपतियों और कारोबारियों के अंदर से अब भय का आतंक समाप्त हो गया है जो लालू-राबड़ी “ाासन काल में था। मुख्यमंत्री नीतीश ने सभी को बेफ्रिक होकर उद्योग-धंधे लगाने की बात कही है। इसी उत्साह को देखते हुए उपमुख्यमंत्री सुषील कुमार मोदी ने छोटे कारोबारियों सहित कई उद्योग के क्षेत्र में सरकारी सहायता के खजाने खोल दिये हैं।
उपमुख्यमंत्री सुषील कुमार मोदी ने गुरुवार को बुनकरों के ऋण माफी की घोशणा कर दी, साथ ही उद्योगों के लिए नई औद्योगिक नीति लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा जल्द ही लौरिया और सुगौली मिले इसी माह चालू कर दी जाएगी। गौरतलब है कि कभी बिहार में सबसे अधिक चीनी मिल हुआ करती थी, लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण अब केवल 3 चीनी मिल ही चल रहे हैं। बिहार के लोग बाहर जाकर मार न खाये इसके लिए रैयाम, सकरी, बिहटा, मोतीपुर में भी जल्द ही उत्पादन “ाुरु किया जाएगा तथा अप्रैल तक पूर्णिया के मरंगा में जूट पार्क की स्थापना किया जाएगा साथ ही उद्यमियों को सरकारी कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की जाएगी। इससे भ्रश्टाचार पर भी बहुत तक लगाम लगाया जा सकेगा। राज्य सरकार के इस पहल को देखते हुए केन्द्र सरकार ने भी बिना गारंटी के लोन देने की घोशणा कर दी है। राज्य सरकार ने भी अब सौ चावल मिल स्वीकृति के साथ किसानों द्वारा खरीदे खद्यान्नों के लिए गोदाम खोलने की घोशणा कर दी है। उद्यमियों को राज्य सरकार के योजनाओं का लाभ सही ढं़ग से मिल सके इसके लिए जल्द ही सम्मेलन करने की बात कही गई है।